5th Dec 2024
एक बार की बात है। एक खरगोश और एक कछुआ जंगल में रहते थे। खरगोश हमेशा तेज दौड़ता था। एक दिन खरगोश बोला, "कछुए भाई, तुम कभी दौड़ नहीं सकते! मैं तो तुमसे बहुत तेज हूँ!" कछुआ मुस्कराया और कहा, "चलो, एक दौड़ लगाते हैं।"
दौड़ शुरू हुई। खरगोश तेजी से भागा और कछुआ धीरे-धीरे चला। कुछ ही दूरी पर खरगोश ने सोचा, "कछुआ तो बहुत पीछे है, मैं एक झपकी ले लूँ।" और वह एक पेड़ के नीचे सो गया। कछुआ धीरे-धीरे चलता रहा और आखिरकार दौड़ जीत गया!
जब खरगोश की आँख खुली, उसने देखा कि कछुआ दौड़ के अंत के करीब पहुँच चुका था। खरगोश हड़बड़ाकर उठा और तेजी से दौड़ने लगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कछुआ धीरे-धीरे अपनी चाल से मंजिल तक पहुंच गया और जीत गया।
खरगोश को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने कछुए से माफी मांगी। कछुआ मुस्कराया और बोला, "मुझे पता था कि धीमी और steady चाल ही दौड़ जीत सकती है।" खरगोश ने सिर हिला दिया और समझ गया कि घमंड करना अच्छा नहीं होता।
उस दिन से खरगोश और कछुआ अच्छे दोस्त बन गए और वे अक्सर साथ में खेलते और मस्ती करते। उन्होंने सीखा कि हर किसी की अपनी खासियत होती है और दोस्ती में यही सबसे महत्वपूर्ण है। और इसी तरह जंगल में सभी जानवर खुशी-खुशी रहने लगे।